Friday, January 4, 2013

खुश्क आंखे



कैसे मे कहू क्या है मेरी कहानी
कभी खुश्क आंखे तो कभी बहता पानी |

Thursday, January 3, 2013

बेटी


कुछ भी तो नहीं माँगा मैंने संसार से |
चाहा था बस सब देखे मुझे प्यार से ||

अभी-२ तो माँ बाप ने बेटी को बेटा माना है |
अभी-२ तो मैंने बेटी होने का फर्ज जाना है ||

पर लोगो की आँखों में शैतान नजर आता है |
शक्ल तो इंसानों की है पर हैवान नजर आता है ||

माँ बाप को गर्व है की मै उनकी बेटी हू |
पर मुझे लगता है कि में अंगारों पै लेटी हू ||

क्यों मुझे सिसक सिसक कर जीना पड़ता है |
क्यों मुझी को अपमान का घूट पीना पड़ता है ||

संभल जाओ वक्त रहते वरना तुम पछताओगे |
खत्म हो जायेगा सब कुछ तुम भी ना बच पाओगे ||

Tuesday, January 1, 2013

वजूद



सितमगर बना दिया एक पल में मुझे
कभी में उसका वजूद हुआ करता था |

क्यों अजीब लगता है



कभी यकीन होता है कभी सब झूठ लगता हैं |
तेरा प्यार मुझे अब जाने क्यों अजीब लगता है ||

सच ओर झूठ कि पहचान नहीं होती अब |
इस कशमकश में रहना मुझको नसीब लगता है ||

कभी लगता है तू छोड़ गया है मुझको राह में |
कभी दूर होकर भी तू मुझको करीब लगता है ||

कभी हर मुसीबत में तुझे अपने पास पाता था |
आज मेरा होकर भी तू मुझको रकीब लगता है ||